मुलाकात

                                                         

मुलाकात

 


EDITED BY PAWAN KUMAR SINGH (Chandigarh university)

आज फिर उससे मुसल्सल मुलाकात हुई
लफ्जों से नहीं...
फिर से आंखों से सारी बात हुई...
सब ठीक तो था दरमियां, फिर क्यों वह हिज्र की रात हुई...
कमी रिश्ते में नहीं थी, फिर क्यों कम यूं हमारी बात हुई...
बैठे रहते हम ही चुपचाप उस रात, जिस रात दर्द से मुलाकात हुई...
छोड़ा ना तुमने न मैंने, बस नामंजूर कुछ हालात हुई
कैसे कह दूं अधूरा नहीं हूं मैं, मेरी आंखें नम थी जब आखिरी उससे बात हुई...
आज फिर उससे मुसल्सल मुलाकात हुई...
खफा ना वो थी हमसे ना हम उससे जब जुदाई की बात हुई...
दुल्हन के जोड़े में देखा था उसे, सुना है बड़ी मशहूर उसकी बारात हुई
चांद का दर्जा दिया करते थे हम, फिर ना कभी चांद रात हुई 
बेगानों से ही रहते हैं अजनबी बन कर हंस लेते हम, बेफिजूल की सारी करामात हुई 
आज फिर उससे मुसल्सल इक मुलाकात हुई
मशहूर थी मोहब्बत हमारी, जो कुछ यूं ही बदनाम हुई 
वो दिन भर साथ मेरे, मगर रात किसी और के साथ हुई
कहानी सुना कर आया हूं अपनी,अदालत में जो आज मात हुई
वो खड़ा था सामने मेरे, कुछ इस कदर मुलाकात कोई 
सुनो आज अधूरी मोहब्बत से फिर से मेरी मुलाकात हुई...

 


                                                                Written by - Malay Tiwari( student at Chandigarh university)

       

19 comments:

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  2. Good job bro deep and heart touching lines

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  3. Sachi mohabat aksar adhuri reh jati h... Great job bruh

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  4. Adhuri kahani I am a big of you sir nice 👌👌👌

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  5. अधूरी मोहब्बत से फिर से मेरी phir मुलाकात हुई...

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  6. These lines are spellbinding bro

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  7. So beautifully written 👏. Reading this was a treat 🤩

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